SBI Research: भारतीयों के खर्च करने का तरीका बदला, खाने-पीने से हटकर अब लाइफस्टाइल पर ज्यादा ध्यान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI Research: भारतीयों के खर्च करने का तरीका बदला, खाने-पीने से हटकर अब लाइफस्टाइल पर ज्यादा ध्यान

SBI Research की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। अब भारतीय परिवारों के कुल बजट का सिर्फ **32.82%** ही खाने-पीने पर खर्च हो रहा है, जबकि बाकी **67%** हिस्सा नॉन-फूड आइटम्स और सर्विसेज पर खर्च किया जा रहा है।

खर्च के पैटर्न में आया बदलाव

HCES 2023-24 के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई SBI Research की इस व्यापक रिपोर्ट में 2,61,953 से ज्यादा परिवारों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। खाने-पीने पर खर्च का स्थिर होना आर्थिक विविधीकरण और बदलते लाइफस्टाइल का संकेत है, लेकिन यह बदलाव हर जगह एक समान नहीं है।

पोषण और जेंडर गैप

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोटीन युक्त आहार पर खर्च करने के मामले में सिक्किम, गोवा और हरियाणा सबसे आगे हैं, जबकि ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ अभी भी पीछे हैं। चिंता की बात यह है कि परिवार के भीतर ही पोषण को लेकर एक 'जेंडर गैप' दिखता है, जहाँ पुरुषों को महिलाओं की तुलना में बेहतर डाइट मिल रही है।

फ्यूल और कल्याणकारी योजनाओं का अंतर

साफ ईंधन (Clean Fuel) के इस्तेमाल में ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच एक गहरी खाई है। गोवा और पंजाब में LPG का इस्तेमाल ज्यादा है, वहीं झारखंड और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में यह अभी भी 15% से कम है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 75% के पार है। इसके अलावा, 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' का लाभ ग्रामीण इलाकों में शहरी इलाकों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तो यह अंतर 40% से भी अधिक देखा गया है।

इन्वेस्टर्स के लिए यह डेटा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि आने वाले समय में लाइफस्टाइल और एजुकेशन सर्विसेज सेक्टर में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि, बुनियादी ढांचे और पोषण में असमानता एक चुनौती बनी रहेगी जिसे सरकार और कंपनियों को मिलकर हल करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.