GDP आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच SBI Research ने सफाई दी है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष **2027** की पहली तिमाही के लिए **7.8%** जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा पूरी तरह सटीक है और आलोचकों ने आधार वर्ष (Base Year) को लेकर गलती की है।
डेटा में हेरफेर के दावों को नकारा
SBI की रिसर्च रिपोर्ट 'Ecowrap' में साफ कहा गया है कि सरकार के जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले विश्लेषकों ने डेटा की गलत व्याख्या की है। दरअसल, सारा विवाद पुराने बेस ईयर (2011-12) और नए बेस ईयर (2022-23) की तुलना करने से शुरू हुआ। आलोचकों ने 2.6% नॉमिनल ग्रोथ का हवाला देकर अर्थव्यवस्था के धीमा होने का दावा किया था, जिसे SBI ने एक 'बुनियादी गलती' करार दिया है। सही आधार पर कैलकुलेशन करने पर नॉमिनल ग्रोथ का आंकड़ा करीब 10.3% आता है।
कैसे हुई सच्चाई की पुष्टि?
SBI के रिसर्चर्स ने खुद जीडीपी डिफ्लेटर (GDP Deflator) को री-कैलकुलेट किया। इसके लिए उन्होंने फसलों, औद्योगिक लागत और सर्विस सेक्टर की कीमतों का विश्लेषण किया। उनके निष्कर्ष Ministry of Statistics and Programme Implementation द्वारा जारी सरकारी आंकड़ों से पूरी तरह मेल खाते हैं, जिससे यह साबित होता है कि सरकारी метоडोलॉजी (Methodology) विश्वसनीय है।
239 बार हुए हैं संशोधन
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय लेखांकन (National Accounting) में डेटा का रिवीजन होना एक सामान्य प्रक्रिया है। साल 2009 के बाद से अब तक करीब 70 तिमाहियों में 239 बार आंकड़े संशोधित किए गए हैं। ये बदलाव इसलिए किए जाते हैं ताकि अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को सही तरीके से पेश किया जा सके।
बाजार के लिए क्या है संकेत?
भले ही SBI ने आंकड़ों का बचाव किया हो, लेकिन इस तरह की बहस से निवेशकों के बीच कन्फ्यूजन पैदा होना स्वाभाविक है। बाजार की नजर अब आगे की तिमाहियों पर है। यदि सरकारी आंकड़ों और रियल-टाइम इंडिकेटर्स जैसे क्रेडिट ग्रोथ, टैक्स कलेक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी के बीच तालमेल बना रहता है, तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
