SBI का बड़ा अनुमान: भारत की GDP पहली तिमाही में **8%** बढ़ेगी, RBI के **7%** के अनुमान से ज़्यादा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
SBI का बड़ा अनुमान: भारत की GDP पहली तिमाही में **8%** बढ़ेगी, RBI के **7%** के अनुमान से ज़्यादा!

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के रिसर्च विंग ने भारत की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान **8%** लगाया है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के **7%** के अनुमान से कहीं ज़्यादा है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि मॉनसून और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

SBI की रिपोर्ट: इकोनॉमी की रफ्तार तेज!

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के रिसर्च टीम ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत ग्रोथ का अनुमान जारी किया है। उनके मुताबिक, 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की GDP 8% की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा लगाए गए 7% के अनुमान से काफी अधिक है।

ग्रोथ के पीछे की वजहें?

SBI की यह 8% की ग्रोथ का अनुमान 54 हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक इंडिकेटर्स पर आधारित है। रिसर्च में पाया गया कि इनमें से 86% इंडिकेटर्स ने अप्रैल-जून तिमाही में तेजी दिखाई है। यह ग्रोथ किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है, बल्कि घरेलू खपत और सरकारी खर्च के मजबूत तालमेल का नतीजा है। खासकर, पैसेंजर व्हीकल की बिक्री और कंज्यूमर क्रेडिट में बढ़ोतरी ने शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी को सहारा दे रहा है।

थोड़ी अलग राय भी

हालांकि, SBI का अनुमान काफी आशावादी है, लेकिन कुछ अन्य एक्सपर्ट्स थोड़ी सतर्क राय दे रहे हैं। HDFC Bank के अर्थशास्त्रियों ने पहली तिमाही के लिए 7.5% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है। वे मानते हैं कि भले ही अभी रफ्तार अच्छी है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ चिंताएं भी हैं। इनमें अनियमित मौसम का कृषि क्षेत्र पर असर, जो ग्रामीण आय के लिए महत्वपूर्ण है, और प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर अनिश्चितताएं शामिल हैं। साथ ही, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी ऊर्जा की कीमतों और व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।

पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का क्या है अनुमान?

पहली तिमाही के अलग-अलग अनुमानों के बावजूद, इस बात पर आम सहमति है कि पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए भारत की ग्रोथ 7% से ऊपर बनी रहने की उम्मीद है। SBI की रिसर्च टीम ने यह भी कहा है कि अगर पहली तिमाही का प्रदर्शन उनके 8% के अनुमान के मुताबिक रहता है, तो पूरे साल के GDP ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया भी जा सकता है।

निवेशकों और पॉलिसीमेकर्स के लिए, आने वाले महीनों में मॉनसून का वितरण (जो कृषि उत्पादन और ग्रामीण खपत को प्रभावित करेगा) और महंगाई पर नज़र रखना सबसे अहम होगा। कमोडिटी की कीमतों या कच्चे तेल की लागत में कोई भी बड़ी वृद्धि डोमेस्टिक महंगाई को बढ़ा सकती है, जिस पर सेंट्रल बैंक को सावधानी बरतनी होगी। इन सब पर कड़ी नज़र रखने से ही पता चलेगा कि शुरुआती रफ्तार साल के दूसरे हिस्से तक बनी रह पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.