State Bank of India (SBI) ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की नॉमिनल GDP ग्रोथ घटकर महज 2.6% रह गई है। बैंक के मुताबिक, यह आंकड़ा गलत डेटा सीरीज की तुलना करने की वजह से आया है। सही बेस-इयर (Base-year) का इस्तेमाल करने पर यह ग्रोथ लगभग 10% के करीब है।
आंकड़ों का असली गणित
SBI की रिसर्च टीम ने 2.6% वाली रिपोर्ट को 'बौद्धिक रूप से बेईमानी' (intellectually dishonest) करार दिया है। दरअसल, यह सारा विवाद सरकार द्वारा GDP कैलकुलेशन के लिए बेस ईयर को 2022-23 में शिफ्ट करने के कारण पैदा हुआ है। 2.6% का गलत आंकड़ा नई सीरीज के ₹88.3 लाख करोड़ के अनुमान की तुलना पुराने, अनरिवाइज्ड ₹86.1 लाख करोड़ के आंकड़े से करने के कारण निकला है।
सही तुलना करने पर, यानी जब इसे रिवाइज्ड बेसलाइन ₹80.4 लाख करोड़ के साथ रखा जाता है, तो नॉमिनल ग्रोथ रेट 9.7% से 10.3% के बीच निकलती है। यह सरकारी आंकड़ों की 7.8% की रियल GDP ग्रोथ के साथ बेहतर तालमेल बिठाता है।
निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
यह विवाद साफ करता है कि सरकारी डेटा में जब भी बेस ईयर का बदलाव होता है, तो पुरानी और नई सीरीज की तुलना करना भ्रामक हो सकता है। SBI ने स्पष्ट किया है कि GDP के शुरुआती आंकड़े फाइनल नहीं होते। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स और होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर इनमें लगातार बदलाव करता रहता है, जो 2029 तक जारी रहेगा।
बाजार पर असर
भले ही बैंक ने स्थिति साफ कर दी हो, लेकिन गलत आंकड़ों से बाजार में बेवजह की अस्थिरता (volatility) पैदा होती है। फिलहाल, SBI ने अपने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। स्टॉक मार्केट की बात करें तो, 2 सितंबर 2026 को SBI के शेयर ₹1,020.90 पर बंद हुए, जिसमें 1.31% की गिरावट देखी गई। निवेशकों की नजर अब RBI की मॉनेटरी पॉलिसी और आने वाले GDP रिविजन्स पर टिकी है।
