रूस अपनी अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए इस साल **70,000** भारतीय वर्कर्स को रोजगार देने की तैयारी में है। हालांकि, कंस्ट्रक्शन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भर्ती की इन खबरों के बीच, भारत सरकार ने फर्जी रिक्रूटमेंट और मिलिट्री में जबरन भर्ती को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है।
रूस की अर्थव्यवस्था में लेबर की भारी कमी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2030 तक वहां 31 लाख वर्कर्स की कमी हो सकती है, जिसके समाधान के लिए मॉस्को ने भारत का रुख किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी दोनों देशों के बीच बढ़ती लेबर कोऑपरेशन की पुष्टि की है। यह पूरा प्लान दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुए समझौतों का हिस्सा है।
ट्रेड बैलेंस का गणित
भारत इस मौके का इस्तेमाल अपने निर्यात (Exports) को बढ़ाने के लिए कर रहा है। अभी तक भारत रूस से केवल एनर्जी इम्पोर्ट करता था, लेकिन अब फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ाने की कोशिश है।
रिक्रूटमेंट का असली खतरा
निवेशकों और नागरिकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'धोखाधड़ी' है। 1 अक्टूबर 2026 को MEA ने एक एडवाइजरी जारी कर बताया कि कई एजेंट लोगों को 'सिविलियन जॉब्स' का झांसा देकर रूस भेज रहे हैं, लेकिन वहां उन्हें जबरन सेना में शामिल किया जा रहा है। सरकार अब तक 140 भारतीयों को सुरक्षित वापस ला चुकी है और 55 अन्य लोगों को वापस लाने की कोशिश जारी है।
निवेशकों के लिए राय
अगर आप फार्मा या इंजीनियरिंग सेक्टर में निवेश कर रहे हैं, तो रूस के साथ बढ़ती ट्रेड वॉल्यूम पर नजर रखें। हालांकि, पेमेंट्स और लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ यह 'वर्क सेफ्टी' मुद्दा एक बड़ा मॉनिटरिंग फैक्टर है। निवेश के नजरिए से देखें तो सरकारी रेगुलेशन और सुरक्षित रोजगार के रास्ते तय होने के बाद ही इन क्षेत्रों में लंबी अवधि का बड़ा असर दिखाई देगा।
