सरकार ने ग्रामीण इलाकों में LPG की उपलब्धता सुधारने के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा **45 दिन** से घटाकर **25 दिन** कर दी है। एक नई रिसर्च के मुताबिक, गांवों में सिर्फ **23%** परिवार ही पूरी तरह LPG का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भारत के ग्रामीण इलाकों में LPG कनेक्शन तो तेजी से बढ़े हैं, लेकिन असली चुनौती इनके नियमित इस्तेमाल की है। CEEW की सितंबर 2026 की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भले ही 73% ग्रामीण घरों तक LPG की पहुंच है, लेकिन केवल 23% परिवार ही इसका पूरी तरह से उपयोग करते हैं। बड़ी संख्या में परिवार आज भी खाना पकाने के लिए लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं।
OMC कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum, और Bharat Petroleum जैसी कंपनियों का रेवेन्यू केवल नए कनेक्शन से नहीं, बल्कि रिफिल वॉल्यूम से आता है। PMUY स्कीम के तहत दिए गए कनेक्शनों का इस्तेमाल बढ़ाना इन कंपनियों के लिए 'प्रॉफिटेबिलिटी' के लिहाज से बहुत जरूरी है।
सरकार का नया रिफिल नियम
सरकार ने सर्विस को आसान बनाने के लिए अब रिफिल बुकिंग की समय सीमा को घटाकर 25 दिन कर दिया है, जो पहले 45 दिन थी। इस बदलाव का उद्देश्य उन इलाकों में सप्लाई चेन को स्ट्रीमलाइन करना है जहां समय पर गैस मिलना एक बड़ी समस्या रही है।
महंगाई और लॉजिस्टिक्स की मार
रिपोर्ट के मुताबिक, 50% से कम ग्रामीण घरों को घर पर डिलीवरी मिलती है, जिससे लोग महंगे अनौपचारिक माध्यमों पर निर्भर हैं। साथ ही, कीमत को लेकर संवेदनशीलता भी बड़ा मुद्दा है। ग्रामीण उपभोक्ता एक 14.2 किलो के सिलेंडर के लिए ₹500 तक चुकाने को तैयार हैं, जबकि PMUY के तहत इसकी सब्सिडी वाली दर ₹642 है। यही कीमतों का अंतर लोगों को वापस पारंपरिक ईंधन की ओर धकेलता है।
इसके अलावा, प्रवासी मजदूरों का एक बड़ा वर्ग अभी भी औपचारिक कनेक्शन से दूर है, जिसमें 80% के पास कोई वैध LPG कनेक्शन नहीं है। आने वाले समय में बाजार की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या 25 दिन का यह नया नियम वाकई में 'ओकेशनल' इस्तेमाल करने वालों को 'रेगुलर' ग्राहक में बदल पाता है या नहीं।
