भारत में 1 जुलाई, 2026 से MGNREGS की जगह नई 'Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission' (VB-G RAM G) लागू हो गई है। जुलाई में रोजगार के आंकड़ों में **50%** की बड़ी गिरावट दिखी, लेकिन अगस्त में स्थिति सुधरती दिख रही है और डिमांड में **23.8%** की मंथ-ऑन-मंथ रिकवरी दर्ज की गई है।
भारत के रूरल एम्प्लॉयमेंट स्ट्रक्चर में 1 जुलाई, 2026 को बड़ा बदलाव आया। सरकार ने पुरानी MGNREGS स्कीम को हटाकर अब VB-G RAM G मिशन को पेश किया है। पुरानी स्कीम में जहां 100 दिन के काम की गारंटी थी, वहीं नई स्कीम में इसे बढ़ाकर 125 दिन प्रति परिवार कर दिया गया है। हालांकि, अब कृषि के पीक सीजन में 60 दिन का 'नो-वर्क' पीरियड भी जोड़ा गया है ताकि खेती के लिए मजदूरों की कमी न हो।
जुलाई का डेटा और अगस्त में सुधार
ट्रांजिशन के पहले महीने में ही बड़े आंकड़े सामने आए। जुलाई 2026 में पर्सन-डेज गिरकर 7.67 करोड़ रह गए, जो जुलाई 2025 के 15.3 करोड़ के मुकाबले लगभग आधा थे। यह डेटा आते ही बाजार में चिंता फैल गई थी। हालांकि, अगस्त के आंकड़े राहत देने वाले रहे और वर्क डिमांड में पिछले महीने के मुकाबले 23.8% का उछाल देखा गया। जानकारों का मानना है कि जुलाई की गिरावट सिर्फ प्रशासनिक बदलाव और नई डिजिटल व्यवस्था के तालमेल बिठाने का नतीजा थी।
राज्यों पर वित्तीय बोझ और तकनीकी चुनौतियां
इस नई मिशन के तहत अब राज्यों को अकुशल मजदूरों की मजदूरी का 40% हिस्सा खुद उठाना होगा। इससे राज्य सरकारों पर फिस्कल बर्डन बढ़ा है, जिससे बजट की कमी वाले राज्यों में रोजगार देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए e-KYC और फेशियल रिकॉग्निशन अनिवार्य कर दिया गया है। सर्वर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की दिक्कतों के कारण रूरल वर्कर को अभी भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन्वेस्टर्स के लिए क्यों है जरूरी?
रूरल एम्प्लॉयमेंट डेटा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वहां की खरीदारी क्षमता का एक बड़ा संकेत होता है। अगर रोजगार जनरेशन में स्थिरता आती है, तो FMCG, टू-व्हीलर और ट्रैक्टर कंपनियों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या अगस्त की रिकवरी आगे भी जारी रहती है और क्या नई डिजिटल व्यवस्था बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से काम कर पाती है।
