साल 2025 तक ग्रामीण भारत में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज का दायरा बढ़कर **47.4%** हो गया है, जो 2017 में महज **14.1%** था। इस उछाल के पीछे Ayushman Bharat PM-JAY योजना का बड़ा हाथ है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अभी भी अस्पताल के **82%** खर्चे लोग अपनी बचत से ही चुका रहे हैं।
इंश्योरेंस का बढ़ता दायरा\n\nनेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें राउंड की रिपोर्ट के मुताबिक, रूरल इंडिया में हेल्थ इंश्योरेंस का पेनिट्रेशन तेजी से बढ़ा है। यह पहली बार है जब ग्रामीण क्षेत्रों का हेल्थ कवरेज शहरी क्षेत्रों (44.3%) से थोड़ा आगे निकल गया है। इस पूरी ग्रोथ का मुख्य इंजन Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB-PMJAY) रही है।\n\n### कागजों पर सुरक्षा, हकीकत में बोझ\n\nभले ही लोग बीमा योजनाओं से जुड़ रहे हों, लेकिन अस्पताल के बिलों का भुगतान करने के मामले में स्थिति अभी भी गंभीर है। डेटा बताता है कि हॉस्पिटलाइजेशन का 81.8% खर्च आज भी लोग अपनी जेब से (Out-of-pocket) कर रहे हैं। वहीं, इंश्योरेंस क्लेम रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) की दर अभी भी सिर्फ 16% के आसपास बनी हुई है।\n\n### सरकारी बनाम प्राइवेट अस्पताल का गणित\n\nप्राइवेट हॉस्पिटलों में इलाज का औसत दैनिक खर्च ₹8,624 है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा ₹1,931 है। फिर भी, 67% से ज्यादा मरीज प्राइवेट अस्पताल चुन रहे हैं। इसकी मुख्य वजह सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, इलाज की क्वालिटी और लंबी वेटिंग लिस्ट है।\n\n### इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?\n\nअब हेल्थकेयर सेक्टर का फोकस सिर्फ रजिस्ट्रेशन बढ़ाने से हटकर सर्विस क्वालिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर शिफ्ट होने वाला है। आने वाले समय में सरकार रिइम्बर्समेंट रेश्यो बेहतर करने और पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की कैपेसिटी बढ़ाने पर काम कर सकती है। इन्वेस्टर्स के लिए सरकारी हॉस्पिटल के कैपेक्स (Capex) और रेगुलेटरी बदलावों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि ये सीधे तौर पर प्राइवेट और पब्लिक हेल्थकेयर के बीच के संतुलन को तय करेंगे।