Rupee News: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, तेल की कीमतों और अमेरिकी यील्ड ने बढ़ाई टेंशन

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee News: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, तेल की कीमतों और अमेरिकी यील्ड ने बढ़ाई टेंशन

भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें **$91** के पार पहुंच गई हैं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड नए हाई पर है। निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या RBI अपनी सीमित होती हस्तक्षेप क्षमता के बावजूद मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर पाएगा।

भारतीय रुपया इस समय काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है और डॉलर के मुकाबले 95.10 से 95.60 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक हालातों ने इमर्जिंग मार्केट्स के सेंटीमेंट को बिगाड़ दिया है, जिससे रुपये को ऊपर उठने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

तेल और अमेरिकी यील्ड का दबाव

इस गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $91 प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं। इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। दूसरा कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का कई सालों के ऊपरी स्तर पर पहुंचना है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के हालिया बयानों से सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे विदेशी निवेशक पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

RBI के सामने 'बैलेंसिंग एक्ट'

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है, लेकिन अब उसके सामने एक बड़ी चुनौती है। डेटा के मुताबिक, RBI की फॉरवर्ड फॉरेक्स बुक रिकॉर्ड $137 बिलियन तक पहुंच गई है। बड़ी फॉरवर्ड बुक होने का मतलब है कि स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप करने की RBI की ताकत अब सीमित हो गई है। ऐसे में बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI अब अपनी इन जिम्मेदारियों को कम करने के लिए डॉलर की खरीदारी कर सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत

महंगी तेल की कीमतें घरेलू स्तर पर महंगाई का खतरा बढ़ा रही हैं, जो आने वाले समय में ब्याज दरों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। विदेशी निवेशकों की निकासी (FII Outflows) इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है, खासकर उन सेक्टरों में जहां विदेशी हिस्सेदारी ज्यादा है। निवेशकों को सलाह है कि वे भारत के ट्रेड बैलेंस और FII के निवेश रुझानों पर कड़ी नजर रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.