सप्ताह की शुरुआत में भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और **95** के स्तर के पास कारोबार कर रहा है। शुक्रवार को मिली मामूली राहत के बाद अब निवेशक ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों और अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर में अनिश्चितता को लेकर सतर्क हैं। हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) का रिकॉर्ड डिफेंसिव स्टैंड रुपये को सहारा देने की कोशिश कर रहा है।
सप्ताह की शुरुआत में भारतीय रुपया 95.10 से 95.30 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। शुक्रवार को आई मामूली रिकवरी के बाद, ग्लोबल स्तर पर बढ़ती चुनौतियों के कारण रुपये का मोमेंटम फिर से सुस्त पड़ गया है।
RBI का 'रिकॉर्ड' कवच
रुपये को गिरने से बचाने के लिए RBI ने बाजार में एक अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा तैयार किया है। सितंबर 2026 के अंत तक, RBI की नेट शॉर्ट डॉलर फॉरवर्ड पोजीशन $239.2 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह रणनीति केंद्रीय बैंक को अपने मुख्य फॉरेक्स रिजर्व को खर्च किए बिना डॉलर की मांग और आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद कर रही है, जिससे करेंसी में कोई बड़ा उलटफेर न हो।
क्यों दबाव में है रुपया?
RBI की कोशिशों के बावजूद, रुपया दो बड़े मोर्चों पर जूझ रहा है:
- क्रूड ऑयल: कच्चा तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ गया है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बना हुआ है।
- अमेरिकी मार्केट की चिंता: अमेरिका के टेक्नोलॉजी सेक्टर, खासकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे भारी खर्च को लेकर बाजार डरा हुआ है। इससे निवेशक 'सेफ एसेट' की तलाश में इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकाल रहे हैं।
निवेशकों के लिए महंगाई और रॉ मटेरियल की लागत पर नजर रखना जरूरी है। यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या विदेशी निवेशक (FIIs) इक्विटी से पैसा निकालना जारी रखते हैं, तो RBI को अपने रिजर्व का और अधिक उपयोग करना पड़ सकता है। फिलहाल, बाजार की निगाहें RBI के अगले कदम और ग्लोबल मार्केट के मूड पर टिकी हैं।
