Rupee News: डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट, **94.80** के करीब फिसली करेंसी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Rupee News: डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट, **94.80** के करीब फिसली करेंसी

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली के चलते भारतीय रुपया दबाव में है। फिलहाल रुपया **94.79** के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसे संभालने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार सक्रिय है।

फिलहाल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.79 के स्तर पर है। करेंसी में मजबूती के हालिया प्रयासों को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारतीय बाजारों से विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने (Outflow) की रफ्तार ने रोक दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस समय इकोनॉमी को सहारा देने के लिए करेंसी मार्केट में पूरी ताकत झोंक रहा है।

कच्चे तेल की आग और मार्केट पर असर

एनर्जी मार्केट में तनाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतों का मतलब है ज्यादा डॉलर की मांग, जो सीधे तौर पर रुपये को कमजोर कर रही है।

इसका असर डोमेस्टिक कंपनियों पर भी पड़ रहा है। Indian Oil Corporation, HPCL, और BPCL जैसी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के मार्जिन पर दबाव है। वहीं, ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को तेल की ऊंची कीमतों से फायदा मिल सकता है।

FPIs की भारी बिकवाली

सितंबर 2026 के पहले ही हफ्ते में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹7,443 करोड़ निकाले हैं। पूरे 2026 में अब तक FPIs कुल ₹2.32 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं, जो 2025 के ₹1.66 लाख करोड़ के आंकड़े से काफी ज्यादा है। निवेशक अभी भारतीय बाजारों के बजाय अमेरिका में ज्यादा बॉन्ड यील्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत बना हुआ है।

RBI की 'फायरपावर'

रुपये को बड़ी गिरावट से बचाने के लिए RBI ने पिछले हफ्ते ही विदेशी मुद्रा बाजार में $8 बिलियन से अधिक की बिक्री की है। आरबीआई के पास $740.8 बिलियन का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता को रोकने के लिए एक मजबूत दीवार का काम कर रहा है।

आने वाले हफ्तों में मध्य पूर्व (Middle East) की जियोपोलिटिकल स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.