सोमवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया **95.81** के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और IPO में आ रहे निवेश का फायदा करेंसी को मिला है, हालांकि रिफाइनर्स की डॉलर मांग ने तेजी को सीमित रखा।
सोमवार को भारतीय रुपया पिछले सत्र के 95.87 के मुकाबले मामूली बढ़त के साथ 95.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह मजबूती करेंसी मार्केट में चल रहे घरेलू और वैश्विक कारकों के बीच एक संतुलन को दर्शाती है।
तेजी की मुख्य वजह
रुपये में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमतों में आई 2% की गिरावट है। ईरान से जुड़ी कूटनीतिक खबरों के बाद कच्चे तेल में यह नरमी भारत के लिए राहत लेकर आई है। कम कीमतों का सीधा मतलब है देश का इंपोर्ट बिल कम होना, जो ट्रेड डेफिसिट के दबाव को घटाता है और महंगाई को कंट्रोल करने में मदद करता है।
दबाव के कारण और फॉरवर्ड मार्केट
हालांकि, तेल कंपनियों और कॉरपोरेट इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की लगातार मांग ने रुपये की तेजी पर 'ब्रेक' लगा दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर IPOs के जरिए आ रहे नए फंड और इंपोर्टर्स की डॉलर खरीदारी के बीच जबरदस्त 'टग-ऑफ-वार' देखने को मिला। इसके अलावा, अगस्त 2027 का फॉरवर्ड प्रीमियम गिरकर 2.94 रुपये पर आ गया है, जो कि ब्याज दरों पर ट्रेडर्स के बदलते नजरिए को दिखाता है।
आगे क्या होगा?
मार्केट की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) की अक्टूबर में होने वाली संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी पर टिकी हैं। फिलहाल निवेशक कच्चे तेल की चाल, घरेलू कैपिटल इनफ्लो और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की कमेंट्री पर नजर बनाए हुए हैं, जो तय करेगा कि आने वाले दिनों में रुपया और मजबूत होगा या फिर से वोलाटिलिटी का शिकार होगा।
