28 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.54** के स्तर पर मजबूत हुआ है। विदेशी मुद्रा के भारी प्रवाह और MSCI रीबैलेंसिंग की उम्मीदों ने करेंसी को सहारा दिया है।
शुक्रवार के कारोबार में भारतीय रुपया शानदार मजबूती के साथ 95.54 प्रति डॉलर के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि सत्र की शुरुआत में इंपोर्टर्स और ऑयल कंपनियों की तरफ से डॉलर की मांग के कारण दबाव बना था, लेकिन बाजार में भारी लिक्विडिटी आने से रुपये ने अपनी गिरावट को थाम लिया।
RBI डिपॉजिट स्कीम का असर
रुपये में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह RBI की स्पेशल USD-INR स्वैप फैसिलिटी है। 21 अगस्त, 2026 तक इस विंडो के जरिए करीब $73 बिलियन की राशि जमा हुई है। 31 अगस्त, 2026 को इसकी डेडलाइन खत्म होने से पहले बाजार में डॉलर का फ्लो बढ़ गया है, जिसने रुपये को सपोर्ट दिया है।
MSCI रीबैलेंसिंग और ग्लोबल संकेत
बाजार पर 31 अगस्त, 2026 को होने वाली MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का भी असर दिख रहा है। इससे भारतीय इक्विटी मार्केट में पैसिव फंड का फ्लो बढ़ने की उम्मीद है, जिससे लोकल करेंसी की मांग बनी हुई है। वहीं, निवेशकों की निगाहें जैक्सन होल (Jackson Hole) में फेडरल रिजर्व के रुख पर हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के बयानों से तय होगा कि आने वाले हफ्तों में इमर्जिंग मार्केट्स की करेंसी पर क्या असर पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अगस्त के अंत में डेडलाइन खत्म होने के बाद लिक्विडिटी का प्रबंधन कैसे होता है, यह देखने वाली बात होगी। क्रूड ऑयल की कीमतें और अमेरिकी ब्याज दरों पर फेड के फैसले आने वाले समय में रुपये की चाल तय करेंगे।
