FY27 की पहली छमाही में भारतीय रुपया (**Indian Rupee**) केवल **1.1%** की गिरावट के साथ मजबूती से खड़ा है। महंगे क्रूड ऑयल और अमेरिका में बढ़ते ब्याज दरों के बावजूद, Reserve Bank of India का भारी-भरकम फॉरेक्स रिजर्व इसे ढाल की तरह सुरक्षा दे रहा है।
बाजार की स्थिति और RBI का दखल
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली छमाही भारतीय रुपये के लिए काफी स्थिर रही है। जहां पिछले साल रुपया 9.9% तक टूटा था, वहीं इस बार गिरावट सीमित रही। रुपये को 96 के स्तर के पास पहुंचने पर बचाने के लिए RBI ने सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिकवाली की है। केंद्रीय बैंक ने डॉलर-रुपया स्वैप फैसिलिटी भी पेश की है, जिससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह आसान हुआ है।
चुनौतियां और दबाव
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा का खर्च सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। Brent crude oil की कीमतें $108 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। चूंकि भारत अपनी 90% तेल जरूरतें आयात करता है, इसलिए डॉलर की भारी मांग रुपये पर दबाव डालती है। वहीं, अमेरिका की 10-year Treasury yields का 5% से ऊपर निकलना डॉलर को और मजबूत बना रहा है।
बॉन्ड यील्ड और आगे की राह
घरेलू बॉन्ड मार्केट में भी हलचल तेज है। 10-year government bond yield बढ़कर 7.17% पर पहुंच गई है, जो पिछले 6 महीनों में 13 बेसिस पॉइंट्स का उछाल है। निवेशकों को अब अक्टूबर में होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि ब्याज दरों और महंगाई पर केंद्रीय बैंक का रुख बाजार की अगली चाल तय करेगा।
मजबूती का आधार
भारत के पास अब $765.90 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो कि एक रिकॉर्ड स्तर है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के अंत से अब तक रिजर्व में $78 बिलियन की बढ़ोतरी हुई है, जो बाजार में किसी भी बड़े संकट से निपटने के लिए एक बड़ा हथियार है।
