RBI की दखल के बाद भारतीय रुपया **94.96** के स्तर पर स्थिर हुआ है। वहीं, tech कंपनी Zoho ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते खर्चों के कारण 2026 तक सैलरी हाइक पर रोक लगा दी है, जबकि NPCI ने UPI मर्चेंट चार्ज को दिवाली के बाद तक टाल दिया है।
भारतीय रुपये ने अपनी हालिया गिरावट को थाम लिया है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त कदमों के बाद यह डॉलर के मुकाबले 94.96 पर बंद हुआ है। करेंसी की अस्थिरता को रोकने के लिए सेंट्रल बैंक ने सरकारी ऑयल कंपनियों के लिए एक समर्पित डॉलर लिक्विडिटी विंडो शुरू की है और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर नियमों को कड़ा कर दिया है। इन कदमों का मकसद करेंसी पर सट्टेबाजी के दबाव को कम करना है। सप्ताह की शुरुआत में रुपये में 1% तक की बढ़त देखी गई थी, हालांकि ग्लोबल फैक्टर्स और क्रूड ऑयल की कीमतों के कारण दबाव अभी भी बना हुआ है।
टेक सेक्टर पर बढ़ता दबाव
टेक्नोलॉजी सेक्टर में Zoho Corporation ने एक बड़ा और कठिन फैसला लिया है। कंपनी के फाउंडर Sridhar Vembu ने पुष्टि की है कि कंपनी 2026 तक कर्मचारियों को सैलरी इंक्रीमेंट नहीं देगी। इसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सॉफ्टवेयर वर्कफ़्लो में शामिल करने का भारी खर्च है। कंपनी के अनुसार, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च 4 गुना बढ़ गया है, जिसके चलते लिक्विडिटी बचाना प्राथमिकता बन गई है। कंपनी ने पिछले 18 महीनों से वर्कफोर्स में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और मार्केटिंग खर्चों में भी भारी कटौती की है।
UPI फीस पर राहत
रिटेल सेक्टर के लिए राहत की खबर यह है कि National Payments Corporation of India (NPCI) ने UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दिवाली तक के लिए टाल दिया है। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था। इस फैसले से छोटे दुकानदारों को त्योहारी सीजन में बड़ी राहत मिलेगी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की तैयारी
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों के तहत, Infosys के को-फाउंडर Nandan Nilekani ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पेपर लीक रोकने के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग और रैंडमाइज्ड डेटा बैंक से ऑटोमेटेड क्वेश्चन पेपर तैयार करने की योजना पर सरकार की टास्क फोर्स विचार कर रही है।
