Rupee News: डॉलर की मजबूती के आगे टूटा रुपया, 95.55 के स्तर पर फिसला

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee News: डॉलर की मजबूती के आगे टूटा रुपया, 95.55 के स्तर पर फिसला

भारतीय रुपया गुरुवार को **11 पैसे** की गिरावट के साथ **95.55** प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर चिंता ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को भारतीय रुपये के लिए दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहा और यह 11 पैसे फिसलकर 95.55 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में दो तरफा दबाव देखने को मिला, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

क्रूड ऑयल का असर क्यों नहीं दिखा?

आमतौर पर जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो रुपये को मजबूती मिलती है क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक है। ब्रेंट क्रूड $86 से $87 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसका मुख्य कारण ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर हुई बातचीत थी। हालांकि, तेल की यह राहत रुपये को सहारा देने के लिए नाकाफी साबित हुई।

डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी महंगाई का दबाव

रुपये में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। डॉलर इंडेक्स 99.15 के आसपास बना हुआ है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़े अभी भी 'स्टिकी' बने हुए हैं, जिससे बाजार को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है। जब अमेरिकी दरें अधिक होती हैं, तो ग्लोबल मनी डॉलर की ओर आकर्षित होती है, जो रुपये जैसे एशियाई करेंसी पर दबाव डालती है।

शेयर बाजार पर भी दिखा असर

इस नकारात्मक माहौल का असर घरेलू इक्विटी बाजार में भी साफ दिखा। BSE Sensex 539.35 अंक गिरकर 76,933.59 पर और Nifty 50 116.90 अंक गिरकर 24,090.85 पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब आगामी 'जैक्सन होल सिम्पोजियम' पर है, जहां केंद्रीय बैंक के अधिकारी मौद्रिक नीति पर बड़ी चर्चा करेंगे।

RBI का सुरक्षा चक्र

निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार रखा है। 21 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, स्पेशल स्वैप फैसिलिटी के तहत करीब $73 बिलियन का इनफ्लो दर्ज किया गया है। विदेशी पूंजी का यह बड़ा भंडार RBI को करेंसी मार्केट में किसी भी तरह की अत्यधिक अस्थिरता को रोकने और रुपये को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद करेगा।

अब सबकी नजरें जैक्सन होल की टिप्पणियों पर टिकी हैं। यदि फेडरल रिजर्व के संकेत सख्त रहते हैं, तो डॉलर की मजबूती बनी रह सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.