Rupee Slips: कच्चे तेल की आग में जला रुपया, डॉलर के मुकाबले **94.84** पर फिसला

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AuthorNeha Patil|Published at:
Rupee Slips: कच्चे तेल की आग में जला रुपया, डॉलर के मुकाबले **94.84** पर फिसला

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें **$100** प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। रुपया डॉलर के मुकाबले **94.84** के निचले स्तर पर आ गया है, जो पिछले एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट है।

तेल की बढ़ती कीमतों का ट्रिपल अटैक

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.7% कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचता तेल देश के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आया है। पहला, भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की डिमांड बढ़ रही है और रुपया कमजोर हो रहा है। दूसरा, ईंधन की बढ़ती लागत का असर देश के लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है।

RBI का दखल और बाजार का हाल

गिरावट को थामने के लिए सरकारी बैंकों ने फॉरेक्स मार्केट में इंटरवेंशन किया है। ये कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इशारे पर उठाए गए ताकि बाजार में अचानक आई भारी अस्थिरता को कम किया जा सके। हालांकि, इस अस्थायी राहत के बावजूद ग्लोबल स्तर पर डॉलर की मजबूती बरकरार है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की खबरों ने डॉलर को और ताकत दी है, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी दबाव में हैं।

मिडिल ईस्ट का तनाव बना सिरदर्द

मौजूदा बाजार की घबराहट के पीछे मिडिल ईस्ट में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का बड़ा हाथ है। निवेशक अब इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर इन्फ्लेशन डेटा पर नजर गड़ाए हुए हैं। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव आगे भी जारी रहने की आशंका है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.