8 सितंबर, 2026 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **10 पैसे** फिसलकर **94.66** पर आ गया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतें **$97** प्रति बैरल के करीब पहुंचने से करेंसी मार्केट पर दबाव बना हुआ है।
करेंसी मार्केट में आज दबाव साफ देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल है। ब्रेंट क्रूड ऑयल $97 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ना तय है।
RBI की नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति को काबू में रखने के लिए इंटरबैंक मार्केट में लगातार सक्रिय है। सेंट्रल बैंक डॉलर की बिकवाली कर रहा है, ताकि रुपये में अचानक बड़ी गिरावट न आए। फिलहाल रुपया 94.00 से 94.75 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। यह दखल एक संकेत है कि RBI किसी एक वैल्यू को बचाने के बजाय उतार-चढ़ाव को सीमित रखने पर जोर दे रहा है।
बाजार का मूड और ट्रिगर्स
करेंसी की इस कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिख रहा है, जहाँ Sensex और Nifty लाल निशान में खुले हैं। हालांकि पिछली बार Foreign Institutional Investors ने ₹280.13 करोड़ की खरीदारी की थी, लेकिन फिलहाल निवेशक सतर्क हैं।
बाजार की नजर अब दो मुख्य ट्रिगर्स पर है:
- भारत और अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा, जिससे महंगाई का अंदाजा लगेगा।
- 16 सितंबर को होने वाली Federal Open Market Committee की मीटिंग, जो ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा तय करेगी।
