Rupee vs Dollar: कच्चे तेल की आग में जला रुपया, रिकॉर्ड FDI के बावजूद दबाव

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Rupee vs Dollar: कच्चे तेल की आग में जला रुपया, रिकॉर्ड FDI के बावजूद दबाव

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों ने भारतीय रुपये की रफ्तार थाम दी है। हालांकि, विदेशी निवेश (FDI) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के संकेत दे रही है, लेकिन निवेशकों के लिए तेल की कीमतों और महंगाई पर नजर रखना जरूरी है।

भारतीय रुपया इन दिनों डॉलर के मुकाबले फिर से संघर्ष कर रहा है। सितंबर में ही रुपये में करीब 0.7% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वेस्ट एशिया में तनाव के बाद से अब तक इसमें 5% की गिरावट आ चुकी है।

तेल और रुपये का कनेक्शन

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में क्रूड ऑयल आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। तेल की कीमतें बढ़ने से बाजार में डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है, जिससे रुपया कमजोर पड़ता है। RBI ने $133 बिलियन के FCNR डिपॉजिट स्कीम के जरिए रुपये को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन तेल के बढ़ते दाम उस राहत को बेअसर कर रहे हैं। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इससे मैन्युफैक्चरिंग और ऑयल-मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है।

FDI का नया रिकॉर्ड

रुपये पर दबाव के बावजूद विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा कायम है। जुलाई में FDI का प्रवाह $7.4 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा है। यह निवेश मुख्य रूप से कम्यूनिकेशन, फाइनेंशियल और कंप्यूटर सर्विसेज में आया है। सबसे ज्यादा फंड मॉरीशस, यूएई (UAE) और अमेरिका से आया है। साथ ही, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

महंगाई का गणित और भविष्य की राह

अगस्त में घरेलू महंगाई दर 4.8% दर्ज की गई थी, जिसमें खाद्य पदार्थ और फ्यूल की बड़ी भूमिका रही है। RBI अब महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन साधने पर जोर दे रहा है। आने वाले समय में ग्लोबल क्रूड ऑयल की चाल ही तय करेगी कि रुपया और कितना गिरेगा या संभलेगा। निवेशकों को RBI के ब्याज दरों संबंधी फैसलों और FDI के ट्रेंड पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.