हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय रुपया दबाव में दिखा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के चलते रुपया **7 पैसे** की गिरावट के साथ **95.96** के स्तर पर सेटल हुआ, हालांकि विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बड़ी गिरावट को थाम लिया।
बाजार का हाल
शुक्रवार को भारतीय रुपया 95.75 के स्तर पर खुला और इंट्राडे में 95.71 तक पहुंचा था। लेकिन, शुरुआती तेजी के बाद करेंसी मार्केट में बिकवाली हावी हो गई और दिन के अंत में रुपया अपने निचले स्तर यानी 95.96 पर बंद हुआ।
गिरावट की मुख्य वजह
रुपये पर दबाव का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल फैक्टर्स रहे। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.24% उछलकर 100.39 पर पहुंच गया है, जिससे अन्य करेंसी के मुकाबले डॉलर मजबूत हुआ है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल $104.60 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतें देश के इंपोर्ट बिल को बढ़ाती हैं, जो सीधे रुपये पर दबाव डालती हैं।
बाजार में कहां से मिली राहत?
इतने दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार से अच्छी खबर आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में ₹599.54 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इसी सपोर्ट के चलते रुपये में बहुत बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली। Nifty 50 इंडेक्स 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23,346.40 पर बंद हुआ, जबकि Sensex में 19.63 अंक की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 74,294.96 पर रहा।
अब निवेशकों की नजरें आने वाले दिनों में अमेरिकी इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डेटा पर टिकी हैं, जो वहां के इंटरेस्ट रेट्स को लेकर संकेत देगा।
