US और Iran के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतें **$97** प्रति बैरल तक पहुंचने के चलते Indian Rupee में कमजोरी देखी जा रही है और यह **94.9-95.0** के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में बुधवार को भारी बिकवाली देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण एनर्जी कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर BSE Sensex और NSE Nifty 50 पर पड़ा है। दोनों प्रमुख इंडेक्स में शुरुआती कारोबार में लगभग 0.9% की गिरावट दर्ज की गई है।
क्रूड ऑयल का असर
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इकोनॉमी के लिए बड़ा सिरदर्द हैं। अगर क्रूड ऑयल $97 प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा है। यह स्थिति रिजर्व बैंक (RBI) के लिए इकोनॉमी को मैनेज करना और भी मुश्किल बना सकती है।
ग्लोबल मार्केट की हलचल
हॉर्मूज जलडमरूमध्य के पास सप्लाई चेन में बाधा के डर से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। ग्लोबल मार्केट में निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में Emerging Markets से अपना पैसा निकालकर US Dollar की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इसके अलावा, US Treasury Yields का 4.8% के आसपास पहुंचना भी भारतीय बाजारों से कैपिटल आउटफ्लो (Capital Outflow) का एक बड़ा कारण बन गया है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और RBI इस बाहरी झटके को कैसे कंट्रोल करते हैं। आने वाले समय में बाजार की चाल क्रूड ऑयल की कीमतों और करेंसी मार्केट में RBI के दखल पर टिकी होगी। कच्चे माल के आयात पर निर्भर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
