Rupee vs Dollar: कच्चे तेल की आग में जल रहा रुपया, **95.57** पर हुआ क्लोज

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee vs Dollar: कच्चे तेल की आग में जल रहा रुपया, **95.57** पर हुआ क्लोज

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी के चलते भारतीय रुपया आज **95.79** के निचले स्तर तक लुढ़क गया। हालांकि, देश का **$785.71 बिलियन** का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) बाजार के लिए एक बड़ा सहारा बना हुआ है।

भारतीय रुपया शुक्रवार को लगातार दबाव में रहा और इंट्रा-डे ट्रेड में 95.79 के निचले स्तर को छूने के बाद अंत में 95.57 के स्तर पर बंद हुआ। पिछले तीन ट्रेडिंग सेशंस में रुपये में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों की नजर अब 96 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर पर टिकी है।

क्रूड की कीमतों का दबाव

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की बढ़ती कीमतें हैं, जो $100 से $108 प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपये पर दबाव साफ दिख रहा है। यह स्थिति न केवल महंगाई को हवा दे रही है, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट को भी महंगा बना रही है।

RBI का सुरक्षा कवच

गिरावट के इस माहौल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पूरी तरह मुस्तैद है। 4 सितंबर, 2026 तक भारत का फॉरेक्स रिजर्व $785.71 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है। यह विशाल भंडार RBI को बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को संभालने की ताकत देता है। इसके अलावा, NRI डिपॉजिट जैसी सुविधाओं के जरिए भी फॉरेन करेंसी जुटाने की कोशिशें जारी हैं।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

रुपये की इस कमजोरी का असर अलग-अलग सेक्टर्स पर अलग तरह से पड़ रहा है:

  • इंपोर्ट-हेवी सेक्टर्स: एविएशन, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और केमिकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए कच्चे माल और ईंधन की लागत बढ़ गई है, जो उनके मुनाफे (Margins) पर चोट कर सकती है।
  • एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स: IT और फार्मा कंपनियां रुपये की कमजोरी से फायदे में रहती हैं, क्योंकि उनकी कमाई विदेशी मुद्रा में होती है, जो रुपये में बदलने पर बेहतर रिटर्न देती है।

आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख ही यह तय करेगा कि रुपया 96 के स्तर को पार करता है या यहीं से संभलता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.