क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट का असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है। गुरुवार को रुपया **4 पैसे** की मजबूती के साथ **95.40** के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
तेल कीमतों में गिरावट से मिली राहत
भारत के लिए क्रूड ऑयल एक बड़ा फैक्टर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर हैं। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड के $90 के नीचे यानी करीब $87.48 प्रति बैरल पर आने से डॉलर आउटफ्लो का दबाव कम हुआ है। यह राहत ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी कूटनीतिक बातचीत के चलते मिली है, जिससे सप्लाई चेन में किसी बड़े व्यवधान का डर कुछ कम हुआ है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्तों में रुपया 96.20–96.50 के स्तर तक दबाव देख सकता है।
RBI की नई रणनीति और विदेशी निवेश
केंद्रीय बैंक (RBI) ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। जून 2026 के डेटा के अनुसार, RBI ने $561 मिलियन की खरीदारी के साथ नेट बायर की भूमिका निभाई है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए FCNR डिपॉजिट और स्वैप फैसिलिटी के जरिए $73 बिलियन का निवेश जुटाया गया है।
मार्केट का हाल
घरेलू शेयर बाजार में अभी सावधानी का माहौल है। Sensex करीब 77,422 और Nifty 24,202 के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में ₹502.63 करोड़ की खरीदारी की है, जो बाजार में बने भरोसे को दर्शाती है।
