सोमवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई है। शुरुआती कारोबार में रुपया **31 पैसे** चढ़कर **95.12** के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और विदेशी फंड की लगातार आवक इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
तेल सस्ता, रुपया मज़बूत: क्या है वजह?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट रुपये के लिए एक बड़ा सहारा बनी है। Brent crude की कीमत 5% गिरकर $83.66 प्रति बैरल पर आ गई है। यह गिरावट मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों से जुड़ी है।;
दरअसल, जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो भारत जैसे देश का इंपोर्ट बिल कम हो जाता है, जिससे चालू खाते (Current Account) पर दबाव घटता है। इसके साथ ही, डॉलर इंडेक्स में भी नरमी देखी गई, जिसने रुपये को और मजबूती हासिल करने का मौका दिया।;
घरेलू बाज़ार के भी मिले हैं संकेत
अंतरराष्ट्रीय हालातों के अलावा, घरेलू बाज़ार के कुछ संकेतों ने भी रुपये को स्थिरता दी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले ट्रेडिंग सेशन में भारतीय इक्विटी में ₹277.48 करोड़ की खरीदारी की थी।;
FIIs का यह लगातार निवेश रुपये की मांग को बनाए रखने में मदद कर रहा है। इतना ही नहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अत्यधिक अस्थिरता को रोकने का काम किया है।;
विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी बढ़ोतरी
RBI के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $6.118 अरब बढ़कर $682.354 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।;
विदेशी मुद्रा भंडार का यह मजबूत स्तर बाहरी झटकों से निपटने में एक बफर का काम करता है और मुश्किल समय में केंद्रीय बैंक को करेंसी को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करता है।;
आगे क्या उम्मीद करें?
बाजार के जानकारों की नजरें अब भी कच्चे तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर टिकी हैं। अगर तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं, तो यह घरेलू महंगाई को काबू में रखने में मदद करेगा, जिसका असर ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।;
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेडर्स आने वाले समय में रुपये के लिए 95.00-95.50 के दायरे पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, विदेशी फंड के प्रवाह और भू-राजनीतिक स्थिरता में किसी भी बदलाव पर भी बारीक नजर रखी जाएगी।
