गुरुवार को भारतीय रुपया **3 पैसे** की बढ़त के साथ **95.25** के स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू शेयर बाजार में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को सहारा मिला है, हालांकि मजबूत डॉलर का दबाव अब भी बना हुआ है।
रुपये की रिकवरी के पीछे की वजहें
गुरुवार के सत्र में भारतीय रुपये ने एक बार फिर संघर्ष करते हुए मामूली रिकवरी दर्ज की। रुपया 95.38 के निचले स्तर से उबरकर 95.25 प्रति डॉलर पर आ गया। इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू शेयर बाजार यानी Sensex और Nifty में देखी गई जोरदार तेजी रही। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाते हैं, तो विदेशी मुद्रा की आवक बढ़ती है, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है।
इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों में आई गिरावट ने भी राहत दी है। कच्चे तेल के दाम घटकर $114.13 प्रति बैरल पर आ गए हैं। चूँकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें कम होने से देश का इंपोर्ट बिल घटता है और ट्रेड डेफिसिट पर दबाव कम होता है।
क्या है डॉलर का दबाव?
राहत मिलने के बावजूद रुपये के लिए चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.26 के ऊंचे स्तर पर बरकरार है। इसका मुख्य कारण US Federal Reserve की सख्त ब्याज दर नीति है। वर्तमान में दरें 3.75% से 4.00% के बीच हैं, जिससे निवेशकों को भविष्य में और बढ़ोतरी का डर सता रहा है। अमेरिकी दरों में तेजी से विदेशी फंड्स अक्सर इमर्जिंग मार्केट्स से निकलकर डॉलर की ओर भागते हैं, जो रुपये के लिए दबाव का काम करता है।
आगे क्या उम्मीद करें?
Mirae Asset Sharekhan के मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में रुपया 94.50 से 95.50 के दायरे में ट्रेड कर सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आगामी GDP आंकड़ों और PCE price index पर होगी, क्योंकि ये डेटा तय करेंगे कि फेडरल रिजर्व का रुख आगे कैसा रहेगा।
