भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले **10 पैसे** सुधरकर **96.65** के स्तर पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि इसमें Reserve Bank of India (RBI) की दखल का बड़ा हाथ है, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते करेंसी पर दबाव बरकरार है।
बाजार का हाल और RBI की रणनीति
गुरुवार को भारतीय रुपये की शुरुआत 96.71 पर हुई थी, जो पिछले सत्र के 96.75 के मुकाबले थोड़ा बेहतर थी। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक (RBI) लगातार डॉलर बेचकर रुपये में आ रही भारी गिरावट को थामने की कोशिश कर रहा है।
क्यों बना हुआ है दबाव?
रुपये के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। ग्लोबल मार्केट में US Dollar Index (DXY) 102.25 के करीब बना हुआ है, जो डॉलर को मजबूती दे रहा है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) का दाम $102 प्रति बैरल के आसपास है। चूंकि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
घटता फॉरेक्स रिजर्व और FII का रुख
सितंबर 2026 में फॉरेक्स रिजर्व $785.71 बिलियन के पीक पर था, जो अब घटकर $734.6 बिलियन रह गया है। यानी रिजर्व में लगभग $50 बिलियन की कमी आई है, जो रुपये को बचाने की कोशिशों का नतीजा है।
इक्विटी मार्केट में भी निराशा है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹6,121.37 करोड़ के शेयर बेचे। इस बिकवाली का असर इंडेक्स पर दिखा और BSE Sensex गिरकर 72,408.15 और NSE Nifty50 22,507.65 के स्तर पर आ गया। RBI द्वारा रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% करने के बाद से निवेशकों का मूड सतर्क बना हुआ है, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए लोन लेना महंगा हो गया है।
