हफ्ते के पहले दिन भारतीय रुपया 95.90 के स्तर पर खुलने की उम्मीद है। बाजार की नजरें National Stock Exchange (NSE) के $2.3 बिलियन वाले IPO से आने वाले विदेशी निवेश और क्रूड ऑयल की कीमतों पर टिकी हैं।
करेंसी मार्केट की चाल
सप्ताह की शुरुआत में रुपया 95.90 से 95.95 के दायरे में कारोबार कर सकता है। पिछली क्लोजिंग 95.87 के मुकाबले, फिलहाल रुपया दो अहम फैक्टर्स से प्रभावित है—विदेशी निवेश का सपोर्ट और ग्लोबल एनर्जी मार्केट का दबाव।
NSE IPO का सहारा
रुपये के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट फैक्टर National Stock Exchange (NSE) का हालिया IPO है। $2.3 बिलियन का यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका है। जब विदेशी निवेशक (FIIs) ऐसे बड़े लिस्टिंग में हिस्सा लेते हैं, तो वे डॉलर लेकर आते हैं और उसे रुपये में बदलते हैं। इससे स्थानीय करेंसी की डिमांड बढ़ती है, जो डॉलर की मजबूती के खिलाफ एक मजबूत कवच का काम करती है।
क्रूड ऑयल में राहत
उधर, एनर्जी मार्केट से अच्छी खबर आ रही है। Brent crude के दाम 2% गिरकर $101.7 प्रति बैरल पर आ गए हैं। चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये पर दबाव कम होता है क्योंकि आयात के लिए कम डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। यह गिरावट ईरान संघर्ष से जुड़ी कूटनीतिक प्रगति और सऊदी अरब से सप्लाई बढ़ने के चलते आई है।
RBI की भूमिका
Reserve Bank of India (RBI) लगातार करेंसी में उतार-चढ़ाव पर नजर रखे हुए है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) $781 बिलियन पर पहुंच चुका है, जो केंद्रीय बैंक को बाजार में किसी भी अचानक हलचल को थामने के लिए एक बड़ा बफर देता है। जानकारों का मानना है कि RBI अपनी रणनीतिक अप्रोच के जरिए लिक्विडिटी मैनेज करना जारी रखेगा, ताकि फॉरेक्स मार्केट में स्थिरता बनी रहे।
