6 नवंबर 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **94.50** के स्तर पर खुला। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है, हालांकि विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार के लिए एक सपोर्ट बनी हुई है।
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को भारतीय रुपया 94.50 के स्तर पर कमजोर शुरुआत के साथ ट्रेड करता दिखा। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल में आई तेजी है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है।
ग्लोबल मार्केट का दबाव
ग्लोबल स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 2.04% बढ़कर $100.30 प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर चिंता बढ़ गई है। साथ ही, डॉलर इंडेक्स (101.71) में 0.17% की बढ़ोतरी ने भी भारतीय करेंसी पर दबाव बनाया है। अमेरिकी रोजगार डेटा और Bank of England के ब्याज दर संबंधी फैसलों ने डॉलर को ग्लोबल स्तर पर मजबूत बनाए रखा है।
रिकवरी के संकेत और चुनौतियां
शुरुआती गिरावट के बावजूद, रुपये ने दिन के कारोबार में कुछ रिकवरी दिखाई और यह 94.36 के उच्च स्तर तक गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा लगातार भारतीय बाजार में आ रहा है, जो रुपये के लिए एक ढाल का काम कर रहा है।
हालांकि, मिडिल ईस्ट, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) अभी भी निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क बने हुए हैं। आने वाले सत्रों में बाजार की नजर RBI की पॉलिसी और विदेशी निवेश के रुख पर टिकी रहेगी, जो रुपये की चाल तय करेंगे।
