भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **96** के स्तर को छूने की कोशिश कर रहा है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के दबाव ने RBI को अपने फॉरेक्स रिजर्व से बड़ी रकम खर्च करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार पर संकट के बादल छाए हैं।
भारतीय रुपया इस हफ्ते काफी कमजोर शुरुआत कर रहा है और डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर के पास ट्रेड कर रहा है। क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों (FPIs) की आक्रामक बिकवाली ने भारतीय करेंसी पर चौतरफा दबाव बना दिया है। निवेशकों के लिए यह सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट मुनाफे और महंगाई पर पड़ने वाला सीधा असर है।
RBI की रणनीति और घटता फॉरेक्स रिजर्व
रुपये को बड़ी गिरावट से बचाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) लगातार फॉरेक्स मार्केट में दखल दे रहा है। हालांकि, इसकी कीमत देश के विदेशी मुद्रा भंडार को चुकानी पड़ रही है। 25 सितंबर, 2026 को खत्म हुए हफ्ते के आंकड़ों के मुताबिक, फॉरेक्स रिजर्व में $18.34 बिलियन की बड़ी गिरावट आई है, जिससे कुल रिजर्व घटकर $747.56 बिलियन रह गया है। यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है, लेकिन डॉलर बेचने की यह मजबूरी भविष्य के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।
कॉर्पोरेट मार्जिन पर असर
कमजोर रुपया भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक दोधारी तलवार जैसा है। जो कंपनियां कच्चा माल बाहर से मंगाती हैं, उनके लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है। इसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), पेंट बनाने वाली कंपनियां और एयरलाइन सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि उन्हें ईंधन के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, IT कंपनियां और फार्मा एक्सपोर्टर्स को इस कमजोरी से कुछ फायदा हो सकता है, हालांकि ग्लोबल डिमांड की अनिश्चितता उनके प्रॉफिट पर भी असर डाल रही है।
मार्केट सेंटिमेंट और आगे की राह
विदेशी निवेशकों ने हाल ही में एक ही सेशन में ₹9,484 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार का मूड खराब है। अब सबकी नजरें RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी मीटिंग पर हैं। जानकारों का मानना है कि महंगाई को काबू करने और रुपये को सपोर्ट देने के लिए RBI बेंचमार्क ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे दरें 5.50% तक पहुंच सकती हैं। निवेशकों को अब क्रूड ऑयल की कीमतों और विदेशी फंड्स के फ्लो पर खास नजर रखने की जरूरत है।
