ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के कारण भारतीय रुपया **95** के स्तर के करीब फिसल गया है। मुद्रा को संभालने के चक्कर में Reserve Bank of India को डॉलर बेचने पड़े, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार **$60 अरब** घटकर **$726 अरब** रह गया है।
करेंसी मार्केट में हलचल
भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और Reserve Bank of India इसे 95 प्रति डॉलर के स्तर के पास थामने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। सेंट्रल बैंक लगातार मार्केट में डॉलर की सप्लाई कर रहा है ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।
क्यों गिर रहा है रुपया?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतें हैं। Brent crude का भाव अभी $108 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर की भारी मांग बनी रहती है। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव आना स्वाभाविक है। हालांकि, कीमतें $110 के स्तर से थोड़ी नीचे आई हैं, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।
फॉरेक्स रिजर्व पर असर
इस बचाव की रणनीति का असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर साफ दिख रहा है। 9 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का फॉरेक्स रिजर्व घटकर $726 अरब पर आ गया है। सितंबर की शुरुआत में यह रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन वहां से अब तक करीब $60 अरब की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बताता है कि रुपये को स्टेबल रखने के लिए RBI को कितनी बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाएगा, जिससे देश के भीतर महंगाई (Inflation) और बढ़ सकती है। अब मार्केट के जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या RBI की यह बचाव रणनीति आगे भी जारी रहेगी या फिर सेंट्रल बैंक एक्सचेंज रेट में और लचीलापन लाएगा। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल और आरबीआई की पॉलिसी पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखनी होगी।
