28 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.88** के स्तर पर कारोबार कर रहा है। Brent Crude के **$107** प्रति बैरल के पार निकलने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल के चलते रुपये पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
करेंसी मार्केट में आज जबरदस्त हलचल है। भारतीय रुपया 95.88 के स्तर पर आ गया है, जो कि 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी करीब है। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में एनर्जी प्राइसेज का बढ़ना और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ऊंचा रिटर्न है।\n\n### इकॉनमी पर इसका क्या असर होगा?\n\nभारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। जैसे ही तेल की कीमतें $107 के पार पहुंचती हैं, देश का इम्पोर्ट बिल (Import Bill) सीधे तौर पर बढ़ जाता है। इससे न केवल ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) चौड़ा होता है, बल्कि डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर दबाव और गहरा हो जाता है। पेंट, केमिकल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।\n\n### अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का खेल\n\nअमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.2% से ऊपर जाना पिछले दो दशकों में पहली बार हुआ है। जब अमेरिका में निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशक अक्सर भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगाना पसंद करते हैं। इस 'कैपिटल आउटफ्लो' ने रुपये की कमर तोड़ दी है।\n\n### RBI की भूमिका\n\nअब सबकी नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर टिकी हैं। मार्केट यह देख रहा है कि क्या RBI रुपये को 96 के स्तर से बचाने के लिए कोई बड़ा कदम उठाएगा या इसे एक नई ट्रेडिंग रेंज में सेट होने देगा। निवेशकों के लिए फिलहाल क्रूड ऑयल की चाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की स्थिरता पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
