Rupee गिरकर पहुंचा ऐतिहासिक निचले स्तर **95.08** पर, Crude Oil की कीमतों में आग से बाजार सहमा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee गिरकर पहुंचा ऐतिहासिक निचले स्तर **95.08** पर, Crude Oil की कीमतों में आग से बाजार सहमा

9 सितंबर 2026 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.08** के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इसकी मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड का **$100** प्रति बैरल के पार निकलना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से बाजार में बिकवाली हावी है और महंगाई का खतरा गहरा गया है।

बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले टूटकर 95.08 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में आई भारी उछाल के बाद देखने को मिली है, जहां ब्रेंट क्रूड $100.73 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) की वजह से खाड़ी देशों से सप्लाई चेन में बाधा आने की आशंका बढ़ गई है, जिससे एनर्जी की कीमतें आसमान छू रही हैं।

इक्विटी मार्केट पर असर

क्रूड की कीमतों में आग लगने और रुपये की कमजोरी का सीधा असर शेयर बाजार पर दिखा है। BSE सेंसेक्स 813.35 अंक फिसलकर 74,764.23 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 203.60 अंक गिरकर 23,431.50 पर आ गया। मार्केट में 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) सेंटीमेंट के कारण विदेशी निवेशक भी पीछे हट रहे हैं। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, FIIs ने आज सत्र के दौरान ₹582.99 करोड़ के शेयर बेचे हैं।

क्यों रुपये पर पड़ता है ऑयल का दबाव?

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात (Import) करता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड महंगा होता है, तो भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की बढ़ती मांग रुपये की कीमत को नीचे धकेलती है। साथ ही, इससे मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने का भी डर है।

सेक्टर पर जोखिम

विशेषज्ञों की नजर उन कंपनियों पर है जो क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स पर निर्भर हैं, जैसे पेंट, केमिकल और एविएशन। इसके अलावा, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMC) भी दबाव में हो सकती हैं क्योंकि अगर वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डालतीं, तो उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।

RBI की सक्रियता

मौजूदा स्थिति को संभालने के लिए RBI पूरी तरह एक्टिव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में हस्तक्षेप किया है और डॉलर की बिकवाली की है ताकि रुपये में अत्यधिक अस्थिरता को रोका जा सके। फिलहाल निवेशक अब पश्चिम एशिया में शांति बहाल होने की खबरों और RBI के अगले कदमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.