सोमवार के कारोबारी सत्र में Indian Rupee में **28 पैसे** की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह **96.03** के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते घरेलू बाजारों में विदेशी निवेशकों ने **₹3,600 करोड़** से अधिक की निकासी की है।
रुपये पर चौतरफा दबाव
अमेरिकी और ईरानी तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी गतिरोध ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर Brent क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा है, जो $108 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है।
शेयर बाजार में भारी बिकवाली
ग्लोबल रिस्क और अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 1,124.02 अंक गिरकर 72,771.72 पर और Nifty 50 360.25 अंक टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई ₹3,693.93 करोड़ की शुद्ध बिकवाली रही, जिसने मार्केट में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट दोनों को प्रभावित किया है।
रिजर्व बैंक और विदेशी मुद्रा भंडार
Reserve Bank of India (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार $14.881 बिलियन घटकर $765.901 बिलियन रह गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट मुद्रा की अस्थिरता को थामने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए हस्तक्षेप का नतीजा हो सकती है। अब निवेशकों की नजरें क्रूड ऑयल की कीमतों की स्थिरता और FOMC की अगली बैठक में ब्याज दरों पर मिलने वाले संकेतों पर टिकी हैं।
