भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **6 हफ्ते** की ऊंचाई यानी **94.39** पर पहुंच गया है। इसकी बड़ी वजह रिकॉर्ड **$136.4 अरब** का FCNR डिपॉजिट इनफ्लो है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने अब बाजार में बढ़ी हुई लिक्विडिटी को मैनेज करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बाजार में हलचल की वजह
सितंबर 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस सुनामी के बाद RBI ने अपनी स्पेशल फॉरेक्स स्वैप सुविधा को तय समय से पहले ही 31 अगस्त, 2026 को बंद कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल $136.4 अरब के इनफ्लो में से $127.2 अरब केवल FCNR(B) डिपॉजिट से आए हैं। इस शानदार इनफ्लो ने भारत के फॉरेक्स रिजर्व को $740 अरब के पार पहुंचा दिया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति काफी सुरक्षित नजर आ रही है।
बैंकिंग सेक्टर में खुशी
इस खबर का असर बैंकिंग सेक्टर पर पॉजिटिव दिखा है। Axis Bank, HDFC Bank, ICICI Bank और State Bank of India (SBI) के शेयरों में हालिया मजबूती के पीछे यही प्रमुख कारण है।
RBI के सामने 'लिक्विडिटी' की चुनौती
हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में डॉलर का आना अर्थव्यवस्था के लिए एक 'लिक्विडिटी हेडक' बन गया है। सिस्टम में कैश की भरमार से महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इकोनॉमी को ओवरहीटिंग से बचाने के लिए RBI को बैंकिंग सिस्टम से ₹6 से ₹7 लाख करोड़ तक सोखने (Absorb) पड़ सकते हैं। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि RBI बिना बैंक मार्जिन और क्रेडिट ग्रोथ को नुकसान पहुंचाए यह पैसा कैसे वापस लेगा।
बाहर से मिल रहे संकेतों पर नजर
रुपए की चाल पर अभी भी बाहरी दबाव बना हुआ है। ईरान-अमेरिका के तनाव के चलते Brent Crude Oil $97 प्रति बैरल की तरफ बढ़ रहा है, जो भारत जैसे बड़े एनर्जी इम्पोर्टर के लिए चिंता की बात है। साथ ही, 15-17 सितंबर को होने वाली US Federal Reserve की बैठक से पहले ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता है। फिलहाल मार्केट एक्सपर्ट्स रुपए को 94.10 से 95.50 के दायरे में देख रहे हैं।
