कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते भारतीय रुपया बुधवार को **13** पैसे मजबूत होकर **95.81** के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू बाजार में सुस्ती के कारण रुपये की तेजी सीमित रही।
रुपये को मिला तेल का सहारा
बुधवार को भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले मामूली सुधार दर्ज किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें घटकर $103.18 प्रति बैरल पर आ गई हैं और डॉलर इंडेक्स भी नरम होकर 101.23 पर पहुंच गया है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल के दाम गिरने से डॉलर की मांग कम होती है, जो रुपये के लिए सपोर्ट का काम करती है।
RBI की निगरानी
करेंसी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक्टिव मोड में है। स्टेट-रन बैंकों ने केंद्रीय बैंक के इशारे पर स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की बिकवाली की, ताकि रुपये को 96.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाने से बचाया जा सके।
FII की बिकवाली का दबाव
रुपये में रिकवरी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का आउटफ्लो चिंता का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में FII ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹9,980.22 करोड़ निकाले हैं, जिससे इस महीने का कुल आउटफ्लो $2.2 बिलियन के करीब पहुंच गया है। इस बिकवाली के चलते बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर बना हुआ है।
बाजार का हाल
घरेलू शेयर बाजार पर भी इसका असर दिख रहा है। S&P BSE Sensex 72,480.29 और Nifty 50 22,620.45 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक डेटा जैसे ADP नॉन-फार्म एम्प्लॉयमेंट आंकड़ों और कोर PCE प्राइस इंडेक्स पर टिकी है, जो ब्याज दरों को लेकर दिशा तय करेंगे।
