GDP के शानदार **7.8%** आंकड़ों के दम पर भारतीय रुपया आज **26 पैसे** की मजबूती के साथ **84.96** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, ग्लोबल तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 7.0% के अनुमान से काफी ऊपर है, जिसने घरेलू मोर्चे पर मजबूती का संकेत दिया है। इसी के दम पर शुरुआती कारोबार में रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 84.96 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
बाजार में मायूसी क्यों?
रुपये की मजबूती के बावजूद शेयर बाजार में सुस्ती है। Sensex और Nifty इंडेक्स में लाल निशान के साथ शुरुआत हुई, जहां सेंसेक्स 121.48 अंक लुढ़क गया। बाजार में यह घबराहट बाहरी कारणों से है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $91.06 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत के लिए, जो क्रूड का बड़ा आयातक है, तेल की ये कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं।
निवेशकों की नजर कहां रखें?
संस्थागत निवेशकों का रुख भी फिलहाल सतर्क है। पिछले सत्र में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने ₹7,985.88 करोड़ के शेयर बेचे हैं। हालांकि, सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जुलाई तक वार्षिक लक्ष्य का 26.8% ही रहा है, जो सरकारी खजाने के बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है। अब निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और FPI के प्रवाह पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि यही दो कारक तय करेंगे कि जीडीपी की यह रफ्तार आगे भी बाजार को सहारा दे पाएगी या नहीं।
