आज भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **84.89** के स्तर पर खुला है, जो पिछले बंद भाव **84.95** से **6 पैसे** ऊपर है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी है।
तेल की कीमतों का सीधा असर
भारतीय रुपए में यह सुधार मुख्य रूप से क्रूड ऑयल के दामों में आई गिरावट के चलते देखने को मिला है। ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल USD 2 फिसलकर USD 111.35 प्रति बैरल पर आ गया है। चूँकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में तेल आयात करता है, इसलिए तेल के दाम कम होने से डॉलर की मांग पर दबाव घटता है, जिससे रुपए को सीधे तौर पर सपोर्ट मिलता है। हाल ही में US और Iran के बीच वार्ता में प्रगति की खबरों ने तेल कीमतों को नरम करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
एशियाई बाजारों में क्या है हलचल?
एक तरफ जहां रुपया मजबूती दिखा रहा है, वहीं अन्य एशियाई करेंसी अमेरिकी डॉलर के आगे संघर्ष कर रही हैं। साउथ कोरियन वॉन और मलेशियन रिंगिट में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चाइनीज रेंमिन्बी में मामूली बढ़त देखने को मिली। यह अंतर साफ करता है कि रुपए की चाल अभी ग्लोबल ट्रेंड से अलग और तेल की कीमतों पर ज्यादा निर्भर है।
आगे क्या होगा?
इन्वेस्टर्स की नजरें अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अगले कदम पर टिकी हैं, जो एक्सचेंज रेट में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। इसके अलावा, अमेरिका में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन भी बाजार के लिए अनिश्चितता का एक बड़ा कारण बने हुए हैं, जिसके नतीजों का असर भविष्य में ग्लोबल करेंसी मार्केट पर पड़ना तय है।
