Indian Rupee लगातार चौथे सत्र में मजबूती के साथ **95.05** के स्तर पर बंद हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और कमजोर डॉलर से करेंसी को बड़ा सपोर्ट मिला है, जिससे इस हफ्ते रुपये में करीब **2%** की रिकवरी दर्ज की गई है।
भारतीय रुपया गुरुवार को 95.05 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले चार दिनों से जारी सुधार को दर्शाता है। पिछले हफ्ते रिकॉर्ड निचले स्तर को छूने के बाद, इस हफ्ते रुपये ने करीब 2% की शानदार रिकवरी की है। इसकी मुख्य वजह डॉलर इंडेक्स में आई नरमी है, जो ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बाद अपने 18 महीने के हाई से नीचे फिसला है।
क्रूड ऑयल का असर
ऊर्जा की कीमतों में कमी का सीधा फायदा भारतीय रुपये को मिला है। ऐसी रिपोर्टें हैं कि अमेरिका रूसी शिपिंग फ्लीट पर से प्रतिबंध कम कर सकता है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे आई हैं। चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए तेल के दाम घटने से इंपोर्ट बिल और विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो पर दबाव कम हुआ है।
वहीं, घरेलू शेयर बाजार में भी मजबूती दिखी और भारतीय बाजार करीब 2% चढ़े। यह तेजी तब आई जब जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
RBI का दखल और ट्रेड डेटा
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है। जानकारों के मुताबिक, सेंट्रल बैंक अपनी फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का इस्तेमाल वोलेटिलिटी को संभालने और रुपये को बचाने के लिए कर रहा है। फॉरवर्ड प्रीमियम के मल्टी-ईयर हाई पर होने से सिस्टम में टाइट लिक्विडिटी के संकेत मिल रहे हैं।
सितंबर के लिए भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट $30.21 बिलियन दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक ही रहा, जिससे बाजार में कोई नेगेटिव सरप्राइज नहीं आया और करेंसी की पॉजिटिव मोमेंटम बरकरार रही। आने वाले समय में ट्रेड बैलेंस और RBI के लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर निवेशकों की नजर टिकी रहेगी।
