मंगलवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया **26 पैसे** की मजबूती के साथ **94.96** के स्तर पर पहुंच गया है। देश की **7.8%** की शानदार GDP ग्रोथ ने करेंसी को सहारा दिया है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
भारतीय रुपया मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को डॉलर के मुकाबले 26 पैसे सुधरकर 94.96 के स्तर पर आ गया है। यह रिकवरी घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों के चलते आई है, जिससे ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद करेंसी को सपोर्ट मिल रहा है।
GDP का सपोर्ट
करेंसी में आई इस मजबूती के पीछे अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ है। इस आंकड़े ने बाजार की उम्मीदों को पार कर दिया है, जिससे घरेलू औद्योगिक और सर्विस सेक्टर की मजबूती का पता चलता है। निवेशकों के लिए यह देश की आंतरिक आर्थिक ताकत का संकेत है।
बाजार का दबाव और FIIs का रुख
भले ही रुपया मजबूत हुआ हो, लेकिन इक्विटी मार्केट में दबाव बरकरार है। शुरुआती कारोबार में Sensex 121.48 अंक और Nifty 52.6 अंक गिरकर कारोबार कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है, जिन्होंने पिछले कारोबारी दिन ₹7,985.88 करोड़ के शेयर बेचे थे। यह दिखाता है कि मैक्रो-इकोनॉमिक आउटलुक बेहतर होने के बावजूद, ग्लोबल अनिश्चितता के कारण शॉर्ट-टर्म कैपिटल फ्लो प्रभावित हो रहा है।
कच्चे तेल की चुनौती
अर्थव्यवस्था के लिए क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें बड़ा रिस्क हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते Brent क्रूड $91.06 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जो भविष्य में रुपये पर दबाव डाल सकता है।
फिस्कल हेल्थ पर नजर
जुलाई के अंत तक केंद्र सरकार का फिस्कल डेफिसिट 2026-27 के लक्ष्य का 26.8% रहा है। हालांकि यह पिछले साल के 29.9% के मुकाबले बेहतर है, लेकिन सरकारी खर्च में अनुशासन की जरूरत बनी रहेगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक कैसे वैश्विक कमोडिटी कीमतों और FII आउटफ्लो के बीच रुपये की अस्थिरता को मैनेज करता है।
