घरेलू शेयर बाजार में रिकवरी के दम पर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **14 पैसे** की मजबूती के साथ **83.85** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, ऑयल इम्पोर्टर्स की तरफ से डॉलर की मांग रुपये की तेजी पर लगाम लगा रही है।
भारतीय रुपये ने आज सुबह के कारोबार में अच्छी रिकवरी दिखाई है और डॉलर के मुकाबले 83.85 का स्तर छू लिया है। पिछले सत्र में कमजोरी देखने के बाद, घरेलू शेयर बाजार में आई तेजी ने रुपये को संभलने में काफी मदद की है।
रुपये की राह में मुश्किलें
हालांकि रुपया अभी भी 84 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है, लेकिन तेल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) की ओर से डॉलर की निरंतर मांग रुपये के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ये कंपनियां आयात बिल चुकाने के लिए लगातार डॉलर खरीद रही हैं, जो रुपये की बढ़त को सीमित कर रहा है।
RBI और फॉरेक्स रिजर्व का रोल
बाजार की नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की भूमिका पर टिकी हैं। फिलहाल भारत का फॉरेक्स रिजर्व लगभग $781 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि रुपये में होने वाली अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए एक मजबूत 'बफर' का काम करती है।
ग्लोबल मार्केट के संकेत
दुनियाभर की निगाहें अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर हैं। मार्केट में इस बात की चर्चा तेज है कि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसकी संभावना 66% जताई जा रही है। वहीं, डॉलर इंडेक्स फिलहाल 101.28 पर स्थिर है।
कच्चे तेल की चुनौती
कच्चा तेल (Brent Crude) इस समय $105.69 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें रुपये पर दबाव डालती हैं। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भू-राजनीतिक तनाव भी सप्लाई चेन और फ्रेट प्रीमियम को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे आने वाले समय में करेंसी में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।
