कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी के संकेत से भारतीय रुपया आज **96.22** से **96.26** के दायरे में खुलने की उम्मीद है। अब बाजार की नजरें RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिक गई हैं।
डॉलर के मुकाबले मजबूती की उम्मीद
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96.22 से 96.26 के स्तर पर संभल सकता है। यह सुधार ऐसे समय में आया है जब करेंसी रिकॉर्ड निचले स्तरों के दबाव में थी। इस सकारात्मक रुख के पीछे मुख्य वजह अमेरिका के कमजोर जॉब डेटा रहे हैं, जहां सितंबर में केवल 29,000 नौकरियां ही जुड़ीं। इसके चलते अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अब 20% से कम हो गई है।
कच्चे तेल और RBI का प्रभाव
ब्रेंट क्रूड ऑयल $97 से $99 प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल के दाम घटने से इंपोर्ट बिल कम होगा, जो रुपये के लिए एक अच्छा संकेत है। वहीं, निवेशकों की निगाहें आज से शुरू हो रही RBI की MPC मीटिंग पर हैं। इस समय रेपो रेट 5.25% पर है और बाजार यह देख रहा है कि सेंट्रल बैंक लिक्विडिटी और मुद्रास्फीति को कैसे मैनेज करता है।
चुनौतियां अब भी बरकरार
भले ही ग्लोबल संकेत बेहतर दिख रहे हों, लेकिन घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली एक बड़ी चिंता बनी हुई है। रुपये पर व्यापार घाटे का दबाव भी बना हुआ है। सेंट्रल बैंक अपनी ओर से डॉलर बेचकर बाजार की अस्थिरता को थामने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रुपये की इस छोटी सी राहत को कभी भी चुनौती दे सकते हैं।
