मंगलवार को भारतीय रुपया **95.94** के स्तर पर बंद हुआ। केंद्रीय बैंक की सक्रिय मदद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद, भारी इम्पोर्ट डिमांड और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने करेंसी पर दबाव बनाए रखा है।
बाजार का हाल और RBI का रुख
मंगलवार के सत्र में भारतीय रुपया 95.94 के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें 3 पैसे की मामूली बढ़त देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच करेंसी 96.03 पर खुली थी और एक समय गिरकर 96.15 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गई थी। मार्केट जानकारों का मानना है कि 96 के स्तर के करीब Reserve Bank of India (RBI) की सक्रिय दखलंदाजी ने बड़ी गिरावट को रोकने में मदद की, क्योंकि इम्पोर्टर्स की ओर से डॉलर की मांग लगातार बनी हुई थी।
कमोडिटी और ग्लोबल फैक्टर
कच्चे तेल की कीमतें, जो भारत के इम्पोर्ट बिल को सीधे प्रभावित करती हैं, ने राहत दी है। Brent crude के फ्यूचर्स 0.40% गिरकर $106.86 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे। हालांकि, मजबूत डॉलर इंडेक्स (101.44) अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। निवेशक अब अमेरिका के लेबर मार्केट और महंगाई के आंकड़ों पर नजर टिकाए हुए हैं, जो ग्लोबल करेंसी ट्रेंड को दिशा देंगे।
FIIs की बिकवाली और बाजार पर असर
इक्विटी मार्केट में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने ₹9,980.22 करोड़ के शेयर बाजार से बाहर निकाले हैं। इसका असर बेंचमार्क इंडेक्स पर दिखा: S&P BSE Sensex 242.65 अंक गिरकर 72,529.07 पर और Nifty 50 64.05 अंक गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ। हालांकि अगस्त में इंडस्ट्रियल आउटपुट ग्रोथ 8% रही, लेकिन ग्लोबल रिस्क और US Treasury yields के बढ़ने से घरेलू बाजार पर दबाव बरकरार है।
