भारतीय रुपया लगातार छठे सत्र में मजबूत हुआ है और डॉलर के मुकाबले **94.49** के स्तर पर बंद हुआ है। RBI के विशेष कार्यक्रमों के जरिए आए **$136 अरब** से अधिक के विदेशी निवेश ने रुपये को बड़ा सहारा दिया है।
रुपये में क्यों दिख रही मजबूती?
भारतीय रुपये ने अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा है और शुक्रवार को यह डॉलर के मुकाबले 94.49 के स्तर पर क्लोज हुआ। इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा चलाए जा रहे विशेष फॉरेन-करेंसी डिपॉजिट और मोबिलाइजेशन प्रोग्राम्स हैं। इन माध्यमों से देश में $136.38 अरब से अधिक का विदेशी फंड आया है, जिसने बाजार की अस्थिरता के बीच रुपये को एक मजबूत कुशन प्रदान किया है।
कच्चे तेल की कीमतों का जोखिम
हालांकि रुपया रिकवर कर रहा है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल ($95 प्रति बैरल के करीब) की कीमतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सरकारी खजाने पर दबाव डालती हैं और सीधे तौर पर रुपये की चाल को प्रभावित करती हैं।
ग्लोबल टेंशन और मार्केट सेंटीमेंट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल सेंटीमेंट में अनिश्चितता है। इस माहौल में सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जो उभरते बाजारों की करेंसी के लिए चुनौती है। घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो शुक्रवार को Sensex और Nifty ने चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, लेकिन निवेशकों को अब भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। आने वाले समय में क्रूड ऑयल के दाम और RBI की अगली चाल ही यह तय करेगी कि रुपया अपनी इस रफ्तार को बरकरार रख पाएगा या नहीं।
