बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **4 पैसे** की हल्की बढ़त के साथ **95.03** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर दबाव अभी भी बरकरार है।
रुपये का हाल और चुनौतियां
भारतीय रुपये ने पिछले दिन के 95.07 के मुकाबले बुधवार को 95.03 पर मामूली रिकवरी के साथ शुरुआत की है। हालांकि, वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती उभरते बाजारों की करेंसी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कच्चे तेल का असर
रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव एनर्जी इम्पोर्ट के चलते है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम 1.37% बढ़कर $115.44 प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह स्थिति सीधे तौर पर देश के इम्पोर्ट बिल और घरेलू महंगाई को प्रभावित करती है।
बाजार में उठापटक
घरेलू शेयर बाजार में आज सुस्ती का माहौल है। BSE Sensex 600 अंक से ज्यादा टूटकर 72,997 पर आ गया है, जबकि Nifty 50 में 146 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 22,604 पर कारोबार कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले सेशन में FIIs ने ₹4,240.39 करोड़ की खरीदारी की थी, लेकिन इसके बावजूद बाजार में बिकवाली का दबाव दिख रहा है, जो निवेशकों के सतर्क रवैये को दर्शाता है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक (FOMC) के फैसलों पर टिकी हैं। ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत ही तय करेंगे कि डॉलर में और तेजी आएगी या रुपया संभलेगा। फिलहाल, कच्चे तेल की कीमतों और सेंट्रल बैंक की कमेंट्री पर नजर रखना जरूरी है।
