11 सितंबर 2026 को भारतीय रुपया **24 पैसे** की कमजोरी के साथ **95.68** के स्तर पर खुला। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़त के चलते करेंसी मार्केट में भारी दबाव देखने को मिल रहा है।
करेंसी मार्केट में कोहराम
करेंसी मार्केट में आज जबरदस्त हलचल रही, जहां रुपया 24 पैसे गिरकर 95.68 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में मची खलबली है। इस समय Brent Crude की कीमतें $107 से $110 प्रति बैरल के रेंज में ट्रेड कर रही हैं। इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी विदेशी निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
क्यों चिंता का विषय है यह?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड ऑयल महंगा होने का मतलब है कि सरकार और कंपनियों को डॉलर में ज्यादा भुगतान करना होगा, जिससे रुपये की मांग घटती है और वैल्यू कम हो जाती है। यह न केवल इंपोर्ट बिल बढ़ाता है, बल्कि डोमेस्टिक मार्केट में फ्यूल और लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ने से महंगाई को भी हवा देता है।
बाजार का हाल और RBI की भूमिका
रुपये की इस कमजोरी का असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर भी दिखा है, जहां Sensex में शुरुआती कारोबार में 600 पॉइंट से ज्यादा की गिरावट आई। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकालने लगे हैं।
अब सबकी नजरें Reserve Bank of India (RBI) पर टिकी हैं। ट्रेडर इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या RBI 95.70 से 96.00 के स्तर के आसपास करेंसी को बचाने के लिए दखल देगा। फिलहाल पेंट, एविएशन, और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टरों के लिए यह स्थिति मार्जिन प्रेशर बढ़ा सकती है।
