भारतीय रुपया (Rupee) डॉलर के मुकाबले **95.57** के स्तर पर बंद हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल के चलते रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है, जिससे यह लगातार पांचवें दिन कमजोर हुआ है।
रुपये में क्यों है हलचल?
शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.57 पर बंद हुआ। ट्रेडिंग के दौरान यह 95.70 पर खुला था और इंट्रा-डे में 95.79 के निचले स्तर तक चला गया था। पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी यह गिरावट भारतीय बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
गिरावट की असली वजह
रुपये पर दबाव की मुख्य वजह ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का बढ़ना है। विदेशी निवेशक (FIIs) जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (डॉलर) की ओर भाग रहे हैं। इस हफ्ते FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹582 करोड़ की बिकवाली की है। जब विदेशी निवेशक शेयर बेचते हैं, तो वे रुपये को बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपये की वैल्यू कम हो जाती है।
RBI का रुख और आगे क्या होगा?
बाजार में चर्चा है कि RBI इंटरबैंक मार्केट में दखल दे रहा है ताकि रुपये की अत्यधिक गिरावट को रोका जा सके। हालांकि, क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें और डॉलर इंडेक्स की मजबूती के सामने सेंट्रल बैंक के उपाय भी सीमित असर दिखा रहे हैं। चूँकि भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए तेल के दाम बढ़ना सीधे रुपये पर बोझ डालता है।
निवेशकों के लिए संकेत
रुपये की इस कमजोरी का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग पड़ेगा। जो कंपनियां आयात पर निर्भर हैं, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है। अब निवेशकों की नजरें आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा पर टिकी हैं, जो डॉलर की दिशा तय करेगा।
