ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय रुपया (Rupee) दबाव में है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से रुपया फिसलकर **95.56** के स्तर पर पहुंच गया है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 13 पैसे की कमजोरी के साथ 95.56 पर खुला। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों का $90 प्रति बैरल के स्तर को पार कर जाना है, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
तनाव की असली वजह
मिडल ईस्ट में गहराते जियोपॉलिटिकल संकट, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सैन्य गतिविधियों ने ग्लोबल ट्रेडर्स की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ता है क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है, जिससे डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है।
फेड का डर और बाजार की चाल
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉर्श के बयानों के बाद सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसका सीधा असर इमर्जिंग मार्केट्स पर पड़ रहा है, जहां से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं। पिछले सेशन में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों से ₹5,039.80 करोड़ की भारी बिकवाली की है।
बाजार पर असर
इस दबाव के चलते BSE सेंसेक्स में 226 अंक और NSE निफ्टी में 120 अंक की गिरावट देखी गई। फिलहाल निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट की स्थिति और विदेशी फंड्स के फ्लो पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में एविएशन, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों पर कच्चे तेल की कीमतों का असर मार्जिन के रूप में देखने को मिल सकता है।
