ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय रुपया (Rupee) दबाव में है। गुरुवार को यह **94.83** प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ, जिससे इसकी लगातार **8** दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया।
भारतीय रुपये के लिए आज का दिन चुनौतीपूर्ण रहा। गुरुवार को कारोबार के दौरान रुपया एक समय 94.33 के मजबूत स्तर पर था, लेकिन अंत में यह 94.83 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट की मुख्य वजह क्रूड ऑयल (Brent Crude) में आई 3.3% की उछाल है, जिससे इसकी कीमत $112.40 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
क्यों दबाव में है रुपया?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से सरकार और कंपनियों को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की वैल्यू गिर जाती है। इसका सीधा असर भारत के ट्रेड बैलेंस और करंट अकाउंट डेफिसिट पर पड़ता है, जिसे लेकर विदेशी निवेशक अब सतर्क हो गए हैं।
बॉन्ड यील्ड और सेक्टर पर असर
इस संकट का असर बॉन्ड मार्केट पर भी दिखा है, जहां 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.46% पर पहुंच गई है, जो पिछले दो सालों में सबसे उच्चतम स्तर है।
सेक्टर की बात करें तो:
- दबाव में: केमिकल, पेंट और एयरलाइन कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ेगा क्योंकि उनके लिए रॉ मटेरियल महंगा हो गया है।
- कुछ राहत: आईटी और फार्मा जैसे सेक्टर, जो अपनी कमाई डॉलर में करते हैं, उन्हें इस उतार-चढ़ाव से थोड़ा सपोर्ट मिल सकता है।
रिजर्व बैंक की नजर
मार्केट डेटा के अनुसार, 94.30 के स्तर के आसपास सरकारी बैंकों द्वारा भारी मात्रा में डॉलर की खरीद देखी गई। RBI लगातार मार्केट में करेंसी स्टैबिलिटी बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखे हुए है। निवेशकों के लिए सलाह है कि जब तक क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल के ऊपर बना रहेगा, तब तक रुपये पर दबाव जारी रहने की संभावना है।
