15 सितंबर, 2026 को भारतीय रुपया **30 पैसे** की कमजोरी के साथ **95.84** के स्तर पर खुला है। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल का **$106** के पार जाना और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है।
मंगलवार, 15 सितंबर, 2026 को रुपया कमजोर रुख के साथ खुला। गणेश चतुर्थी की छुट्टी के बाद जब बाजार खुले, तो रुपया पिछले बंद भाव 95.54 के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 95.84 प्रति डॉलर पर आ गया।\n\n### क्रूड ऑयल का संकट\nइस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एनर्जी की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल $106.94 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। मध्य-पूर्व में तनाव और सऊदी अरब में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की खबरों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल सीधा प्रभावित होता है। डॉलर की बढ़ी हुई मांग रुपये पर भारी पड़ रही है।\n\n### FIIs की बिकवाली और ग्लोबल सेंटीमेंट\nकेवल तेल ही नहीं, बल्कि ग्लोबल स्तर पर 'सेफ-हेवन' एसेट के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ गई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी डॉलर को मजबूत कर दिया है, जिससे रुपये जैसी उभरती करेंसी कम आकर्षक हो गई हैं। इसके अलावा, घरेलू मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को ₹930.90 करोड़ के शेयर बेचे। जब FIIs अपना पैसा निकालकर डॉलर में कन्वर्ट करते हैं, तो रुपये पर दबाव और बढ़ जाता है।\n\n### इकोनॉमी पर असर\nनिवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है। साथ ही, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से घरेलू महंगाई बढ़ने का खतरा है, जो आगे चलकर रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है। फिलहाल बाजार की नजरें क्रूड ऑयल के भाव और FIIs की खरीदारी के आंकड़ों पर टिकी हैं।
