भारतीय रुपया 21 अगस्त, 2026 को डॉलर के मुकाबले ₹95.71 पर बंद हुआ, जो 3 पैसे की मामूली बढ़त है। अमेरिकी डॉलर में नरमी से कुछ सहारा मिला, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये की मजबूती पर लगाम लगा दी।
रुपये ने दर्ज की मामूली बढ़त
शुक्रवार, 21 अगस्त, 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे मजबूत होकर ₹95.71 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी दिवस पर यह ₹95.74 पर था। पूरे दिन के कारोबार में, रुपया ₹95.65 के ऊपरी स्तर और ₹95.75 के निचले स्तर के बीच रहा, जो विदेशी मुद्रा बाजार में सतर्क रुख को दर्शाता है।
वैश्विक दबावों का असर
रुपये की चाल पर वैश्विक घटनाओं का मिला-जुला असर देखने को मिला। एक ओर, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी से भारतीय रुपये को कुछ सहारा मिला। जब डॉलर कमजोर होता है, तो उभरते बाजारों की मुद्राओं को अक्सर समर्थन मिलता है। हालांकि, इस सकारात्मक प्रभाव पर बाहरी आर्थिक दबावों ने पानी फेर दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है, जिसका विशेष प्रभाव ऊर्जा की कीमतों पर पड़ा है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का सबब
चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर देश के आयात बिल और मुद्रा स्थिरता को प्रभावित करती हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $93 प्रति बैरल के करीब बना हुआ है, जो रुपये पर दबाव बना रहा है। निवेशक इन ऊर्जा कीमतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि किसी भी बड़ी वृद्धि से तेल आयात के भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये की मजबूती सीमित हो सकती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
घरेलू मोर्चे पर, इक्विटी बाजारों में मिली-जुली तस्वीर दिखी। हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी दिन के अंत में थोड़ा ऊपर बंद हुए, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इक्विटी बाजार में बिकवाली जारी रखी। पिछले दिन FIIs की नेट बिकवाली ₹583.36 करोड़ दर्ज की गई थी। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली अक्सर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालती है, क्योंकि यह भारतीय बाजार से पूंजी के बहिर्वाह का संकेत देता है।
RBI का दृष्टिकोण और भविष्य की राह
इन अल्पकालिक दबावों के बावजूद, केंद्रीय बैंक (RBI) का दीर्घकालिक दृष्टिकोण अस्थिरता को प्रबंधित करने पर केंद्रित है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग $80 बिलियन के विदेशी मुद्रा इनफ्लो की उम्मीद जताई है, जो मुद्रा को बाहरी झटकों से बचाने में मदद कर सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए इन इनफ्लो का रुपये की मजबूती पर वास्तविक प्रभाव सीमित रहा है।
निकट अवधि में रुपये का भविष्य मध्य पूर्व की स्थिति के विकास और तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव से जुड़ा रहेगा। निवेशक रुपये की दिशा के संकेतों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेश प्रवाह और अमेरिका-ईरान संबंधों पर किसी भी नए अपडेट पर नजर रख सकते हैं।
